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बुधवार, 13 नवंबर 2024

काल्ह कउआ बताबत रहा सुआ से।

 काल्ह कउआ बताबत रहा सुआ से।

ओही मोतिआ बिन्द होइगा जग्ग के धुंआ से।।
जयन्त भले बड़े बाप केर बेटबा आय
ओहू कै आँख फुटि गै कुदृष्टि खुआ से।।
उनखे मन मा ही खराबी की तन ख़राब है
खजुरी उच रही ही मखमल के रुआ से ।।
सिंघासन के पेरुआ सब दिन भयभीत रहे हें
कबौं सामना नहीं किहिन खुल के गेरुआ से।।
कहि द्या खबीस से कि वा उछिन्न ना करय
हंस कै रण चण्डी टोर देयी नेरुआ से ।।
हेमराज हंस - भेदा मैहर

अपना चिन्ह प्रतीक।।

 माँ  शारद  से  बिनय  है, हरबी  होई नीक। 
मइहर के साहित्य कै, अपना चिन्ह प्रतीक।।   

रविवार, 10 नवंबर 2024

गदहा परेसान है गइया के प्रतिष्ठा मा।।

पसीना का ठगि  के वा  बइठ हबै  भिट्ठा मा। 
कइउ  ठे लजुरी   खिआनी   है   घिट्टा  मा । । 
सेंतय   का   जरा   बरा   जाथै   कमेसुर वा 
गदहा  परेसान  है  गइया  के  प्रतिष्ठा   मा । । 
हेमराज हंस 

शुक्रवार, 8 नवंबर 2024

बाबू जी।


                   बाबू जी 
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बड़ी मुसीबत झेल के हमही, पालिन पोसिन बाबू जी। 
लदी गरीबी से  गाड़ी  का, बल  भर  ढ़ोसिन  बाबू जी।।

मन तक गहन धरिन बेउहार के हम पंचेन के पढ़ाई मा 
पै न तन मा रही  सिरिहिरी , कबौ ना  घोसिन बाबू जी।।

बब्बा जी  के गुजरे  माही,   भींज  रहीं   दोउ  आँखी
तउ फुआ का धीर बंधाबत अँसुआ पोछिन  बाबू जी।।

बड़की नातिन के काजे मा, ओइन  कन्या दान किहिन 
बिन अम्मा के पीर हिदय मा खूब समोखिन बाबू जी।।

हिबै  बरा अस जिनखर छांही  हर शाखा से निकरी जर 
राम  चरित  मानस  चउपाई, प्रेम से घोखिन  बाबू जी।।

एक  ईमान दार  पिता   कै  संतान   होब   है  हंस  गर्व 
कबाै  न काहू का गर मुधिआइन औ मुसोसिन  बाबू जी।।
हेमराज हंस भेड़ा मैहर -9575287490 

काहू का लिफाफा पियार है।

 काहू का पगड़ी काहू का  साफा पियार है।
काहू  का ता केबल   लिफाफा  पियार  है।।
हमही  आपन  देस  औ  पुरखा पिआर हें   
बिदेसी बिचार का उन्ही पापा पियार है।।
हेमराज हंस भेड़ा  मैहर मप्र 

सोमवार, 4 नवंबर 2024

तुम बत्तीसी काढ़ दिहा औ खीस निपोरे चले गया।

 तुम बत्तीसी  काढ़  दिहा औ खीस निपोरे चले गया। 

गील पिसान हमार देख परथन का बटोरे चले गया।। 


सिसकत राति से पूछि लिहा कस लाग पलेबा खेते मा 

तुम बिदुरात साँझ देखय का बड़े अँजोरे चले गया।। 


 गाय बिआन ता बनी पेंउसरी  पै पेटपोछना  नहीं  रहा 

पूरा दिन महतारी रोयी  तुम बिन मुँह फोरे चले गया।। 


जब से रोमा झारिस नफरत प्रेम का रकबा घटा खूब 

खसरा  माही  दर्ज  खैरिअत  झूंटय  झोरे चले गया।। 


काल्ह  फलनिया  कहत  रही या सरबार मा  गाज गिरै 

कउनव  साध न पूर भयीं , बस गउखर जोरे चले गया।।


चित्रकूट मा दीपदान का खासा जबर  जलसा भा हंस 

पै तोहार नजर  गदहा  हेरैं  ता उनखे  ओरे चले  गया।। 

हेमराज हंस -भेड़ा मइहर 

मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024

अपना जेही छू देयी वा सोन बन जाथै ।

 अपना जेही छू देयी वा सोन बन जाथै । 

खारा  पानी  जम  के  नोन  बन  जाथै ।।

सौ  सौ  प्रनाम अपना के पयसुन्नी का 

असीसे से जेखे कोण  सटकोण बन जाथै।   

सोमवार, 28 अक्टूबर 2024

रात सजी जग मग जागत है।

 रात  सजी  जग मग  जागत है। 

देस  स्वस्तिक  अस   लागत है।। 

दिया  लेस के  कहय  अमाबस 

हे ! रघुनंदन  जू का स्वागत है। । 

हेमराज हंस  भेड़ा  

रविवार, 27 अक्टूबर 2024

नल कुबेर के हिदय मा,

 नल  कुबेर  के हिदय  मा, काहे उचय  न  टीस। 

वा एक तो बड़मंसी  लिहिस, औ मागै बकसीस।। 

भला बताई आप से, कउन ही आपन सउंज।
अपना बोतल का पियी, हम पी पानी अउंज।।

शनिवार, 26 अक्टूबर 2024

लाट बनमै का रहा खाम्हा बना दइस ।

 लाट  बनमै   का  रहा  खाम्हा बना दइस । 

छाया  कम  रही  ता  लम्मा   बना  दइस।।


देस  के  करतूती   बइठ  हें  हाथ  सकेले

सेंत  का  अनाज  निकम्मा   बना  दइस।।


का खुरपी गहन कीन्हे का मुक्तये हँसिया के 

वा  कबरा काही रंग के  तम्मा  बना दइस।।


अठमाइनव  चढ़ाये  मा देवी   रिसान  ही 

पाँव  छुए  काम  सब अम्मा  बना  दइस।।


घिनहा  आतंक  बगरा  हबै कालयबन का 

कइसा दुस्ट दादू का रम्भा  बना दइस।।


वा बोली के बखरी मा है बहुरी बरात अस 

कइसा अडारन हंस का ब्रह्मा बना दइस।।

हेमराज हंस भेड़ा मइहर मप्र