लेबल
- अटल जी
- अटलबिहारी।
- अम्मा
- आचार्य रामाधार शर्मा अनंत जी मैहर
- आदि शंकराचार्य
- कवि मैथलीशरण शुक्ल
- कवि रवि शंकर चौबे
- कविवर रामनरेश तिवारी मैहर
- कुण्डलिया
- खजुलैयां
- खेल
- गोस्वामी तुलसीदास
- ग्राम गौरव
- घटना
- जनम दिन
- जयराम शुक्ल जी
- तीजा
- दशहरा
- दीपाबली
- दीपावली
- दोहा
- नवरात्रि
- परसुराम
- फागुन
- बघेली कविता
- बघेली कुण्डलिया
- बघेली गीत
- बघेली छंद
- बघेली दोहा
- बघेली बाल गीत
- बघेली मुक्तक
- बाबू जी
- बाल दिबस
- भेड़ा
- मतदान
- मुक्तक
- मुक्तक बघेली
- मैहर जिला
- लक्ष्मण सिंह परिहार लगरगवाँ
- लोकरत्न कक्का
- शम्भू काकू
- श्री सूर्यमणि शुक्ल
- स्वागत
- हरछठ
- B.J.P.
- bagheli
- bagheli ghajal
- BAGHELI KAVI HEMRAJ HANS BHEDA
- bagheli kavita
- bagheli muktak
- BAGHELI SHABDKOSH
- CHITRKOOT KAVI SAMMELAN 14.08.2024
- GANESH PUJAN
- MAIHAR DHAM
- MAIHAR STATE
- sahitya
- SAMMAN PATRA
- SHLOK
शनिवार, 11 जनवरी 2025
BAGHELI SAHITYA ( बघेली साहित्य ) : गदहा परेसान है गइया के प्रतिष्ठा मा । ।
BAGHELI SAHITYA ( बघेली साहित्य ) : गदहा परेसान है गइया के प्रतिष्ठा मा । ।: पसीना का ठगि के वा बइठ हबै भिट्ठा मा। कइउ ठे लजुरी खिआनी है घिट्टा मा । । सेंतय का जरा बरा जाथै कमेसुर वा गदहा परेस...
शनिवार, 14 दिसंबर 2024
दूगुन आमदानी का प्रमान आबा है।
दूगुन आमदानी का प्रमान आबा है।
करजा मा लदा किसान आबा है।।
उनखे खातिर है मूड़े के पीरा अस
इनखे निता सीधा पिसान आबा है। ।।
गुरुवार, 12 दिसंबर 2024
हमरे नुकसान केर डाँड़ बांकी है।
हमरे नुकसान केर डाँड़ बांकी है।
दुस्ट औ कृतघ्न कै दुइ फांड़ बांकी है।।
जोकर उपाय कइ सब हीच चुके हैं
फलाने कहि रहें हें की भाँड़ बांकी है। ।
जे गरीब तक से लिहिन
जे गरीब तक से लिहिन, अपने पुरबी घूंस।
देशभक्ति के सभा मा, ओखर जबर जलूस।।हेमराज हंस
सुध कीन्हिस कोउ आई हिचकी।
गीतांश ---
सुध कीन्हिस कोउ आई हिचकी।
अपना ता सेंतय का बिचकी।।
बीत रहीं अगहन की रातैं।
कुकर करै अदहन की बातैं।।
सुन सुन के बिदुराथी डेचकी।
सुध कीन्हिस कोउ आई हिचकी।।
रहि - रहि के सुहराथै तरबा।
मुंदरी से बोलियाथै फ्यरबा।।
औ आपन अंगुरी चूमै सिसकी।
सुध कीन्हिस केउ आई हिचकी।।
सोमवार, 2 दिसंबर 2024
काल्ह कउआ बताबत रहा सुआ से
काल्ह कउआ बताबत रहा सुआ से।
ओही मोतिआ बिन्द होइगा जग्ग के धुंआ से।।
जयन्त भले बड़े बाप केर बेटबा आय
ओहू कै आँख फुटि गै कुदृष्टि खुआ से।।
उनखे मन मा ही खराबी की तन ख़राब है
खजुरी उच रही ही मखमल के रुआ से ।।
सिंघासन के पेरुआ सब दिन भयभीत रहे हें
कबौं सामना नहीं किहिन खुल के गेरुआ से।।
कहि द्या खबीस से कि वा उछिन्न ना करय
हंस कै रण चण्डी टोर देयी नेरुआ से ।।
हेमराज हंस - भेदा मैहर
गुरुवार, 21 नवंबर 2024
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
-
साहुत बनामय खातिर जे कउल रहे हें। उइ तखरी मा गूलर का तउल रहे हें।। कान बहय लागी जो सुन ल्या हा फुर हेन जात बाले जातै का पउल र...
-
बघेली दारू बन्द बिहार मा लागू कड़क अदेश। भर धांधर जो पिअय खै आबा मध्य प्रदेश। । आबा मध्य प्रदेश हियां ता खुली ही हउली। पानी कै ही ...