या बिकास का रेला द्याखा।
धँसा सड़क मां ठेला द्याखा।।
चालीस केर बेसाहन नरियर
सरहा निकरा भेला द्याखा। ।
होय खूब सम्मान औ , चढ़ै रोज जल फूल।
रेंड़ा तुलसी का कहै, चिढ़ के ऊल जलूल।।
हेमराज हंस
हमरे नुकसान केर डाँड़ बांकी है।
जे गरीब तक से लिहिन, अपने पुरबी घूंस।
देशभक्ति के सभा मा, ओखर जबर जलूस।।