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बुधवार, 2 दिसंबर 2015
बघेली साहित्यbagheli sahitya हेमराज हंस : लूट लूट बखरी बनाये रहा नेता जी। ।
बघेली साहित्यbagheli sahitya हेमराज हंस : लूट लूट बखरी बनाये रहा नेता जी। ।: योजना के तलबा म घूँस का उबटन लगाये , भ्रष्टाचार पानी म नहाये रहा नेता जी। चमचागीरी के टठिया म बेईमानी का व्यंजन धरे मानउता का मूरी अस ...
लूट लूट बखरी बनाये रहा नेता जी। ।
योजना के तलबा म घूँस का उबटन लगाये ,
भ्रष्टाचार पानी म नहाये रहा नेता जी।
चमचागीरी के टठिया म बेईमानी का व्यंजन धरे
मानउता का मूरी अस खाये रहा नेता जी।।
गरीबन के खून काही पानी अस बहाये रहा
टेंटुआ लोकतंत्र का दबाये रहा नेता जी।
को जानी भभिस्स माही मौका पउत्या है कि धोखा
लूट लूट बखरी बनाये रहा नेता जी। ।
हेमराज हंस ======
भ्रष्टाचार पानी म नहाये रहा नेता जी।
चमचागीरी के टठिया म बेईमानी का व्यंजन धरे
मानउता का मूरी अस खाये रहा नेता जी।।
गरीबन के खून काही पानी अस बहाये रहा
टेंटुआ लोकतंत्र का दबाये रहा नेता जी।
को जानी भभिस्स माही मौका पउत्या है कि धोखा
लूट लूट बखरी बनाये रहा नेता जी। ।
हेमराज हंस ======
Labels:
बघेली छंद
Location:
Maihar, Madhya Pradesh 485771, India
मंगलवार, 1 दिसंबर 2015
बघेली साहित्यbagheli sahitya हेमराज हंस : हाँ हजूर हम दुइ कउड़ी के पै अपना कस नीच नही।
बघेली साहित्यbagheli sahitya हेमराज हंस : हाँ हजूर हम दुइ कउड़ी के पै अपना कस नीच नही।: हाँ हजूर हम दुइ कउड़ी के पै अपना कस नीच नही। छर छंदी के जीवन बाले माया मृग मारीच नही। । भले मशक्कत कै जिदगानी छान्ही तरी गुजारी थे हमी...
बघेली साहित्यbagheli sahitya हेमराज हंस : वा तोहरे बोलिआय का भउजाई आय नेता जी । ।
बघेली साहित्यbagheli sahitya हेमराज हंस : वा तोहरे बोलिआय का भउजाई आय नेता जी । ।: उइ कहा थें देस से गरीबी हम भगाय देब गरीबी य देस कै लोगाई आय नेता जी। गरीबी भगाय के का खुदै तू पेटागन मरिहा वा तोहई पालै निता बाप माई ...
वा तोहरे बोलिआय का भउजाई आय नेता जी । ।
उइ कहा थें देस से गरीबी हम भगाय देब
गरीबी य देस कै लोगाई आय नेता जी।
गरीबी भगाय के का खुदै तू पेटागन मरिहा
वा तोहई पालै निता बाप माई आय नेता जी। ।
गरीबी के पेड़ का मँहगाई से तुम सींचे रहा
तोहरे निता कल्प वृक्ष नाइ आय नेता जी।
भाषन के कवीर से अस्वासन के अवीर से
वा तोहरे बोलिआय का भउजाई आय नेता जी । ।
हेमराज हंस
गरीबी य देस कै लोगाई आय नेता जी।
गरीबी भगाय के का खुदै तू पेटागन मरिहा
वा तोहई पालै निता बाप माई आय नेता जी। ।
गरीबी के पेड़ का मँहगाई से तुम सींचे रहा
तोहरे निता कल्प वृक्ष नाइ आय नेता जी।
भाषन के कवीर से अस्वासन के अवीर से
वा तोहरे बोलिआय का भउजाई आय नेता जी । ।
हेमराज हंस
गुरुवार, 19 नवंबर 2015
बघेली साहित्यbagheli sahitya हेमराज हंस : जे बदल दइस भूगोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का।
बघेली साहित्यbagheli sahitya हेमराज हंस : जे बदल दइस भूगोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का।: जे बदल दइस भूगोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का। इतिहास करिस भू डोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का। । नब्बे हजार पाकिस्तानिन से कनबुड्ढी लगबाइन जे...
बघेली साहित्यbagheli sahitya हेमराज हंस : जे बदल दइस भूगोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का।
बघेली साहित्यbagheli sahitya हेमराज हंस : जे बदल दइस भूगोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का।: जे बदल दइस भूगोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का। इतिहास करिस भू डोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का। । नब्बे हजार पाकिस्तानिन कनबुड्ढी लगबाइन जे कबौ...
जे बदल दइस भूगोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का।
जे बदल दइस भूगोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का।
इतिहास करिस भू डोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का। ।
नब्बे हजार पाकिस्तानिन से कनबुड्ढी लगबाइन
जे कबौ न खाइन झोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का। ।
हेमराज हंस
इतिहास करिस भू डोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का। ।
नब्बे हजार पाकिस्तानिन से कनबुड्ढी लगबाइन
जे कबौ न खाइन झोल नमन वा इन्दिरा गाँधी का। ।
हेमराज हंस
बघेली साहित्यbagheli sahitya हेमराज हंस : हाँ हजूर हम दुइ कउड़ी के पै अपना कस नीच नही।
बघेली साहित्यbagheli sahitya हेमराज हंस : हाँ हजूर हम दुइ कउड़ी के पै अपना कस नीच नही।: हाँ हजूर हम दुइ कउड़ी के पै अपना कस नीच नही। छर छंदी के जीवन बाले माया मृग मारीच नही। । भले मशक्कत कै जिदगानी छान्ही तरी गुजारी थे हमी...
हाँ हजूर हम दुइ कउड़ी के पै अपना कस नीच नही।
हाँ हजूर हम दुइ कउड़ी के पै अपना कस नीच नही।
छर छंदी के जीवन बाले माया मृग मारीच नही। ।
भले मशक्कत कै जिदगानी छान्ही तरी गुजारी थे
हमीं गर्व है कि बेईमानी हमरे तनिक नगीच नही। ।
हेमराज हंस----- 9575287490
छर छंदी के जीवन बाले माया मृग मारीच नही। ।
भले मशक्कत कै जिदगानी छान्ही तरी गुजारी थे
हमीं गर्व है कि बेईमानी हमरे तनिक नगीच नही। ।
हेमराज हंस----- 9575287490
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बघेली भले बगडूरा से घर म धूर आय गै। पै आँधी से लड़य कै सहूर आय गै। । लागा थै ओही कुसाइयित गेरे ही या दारी अलही भर पूर आय गै। । ...